पृथिवी सौरमण्डल का एक ग्रह
है अतः इस पर सूर्य,
चन्द्र
तथा सौरमण्डल के अन्य ग्रहों का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है | पृथिवी अपनी विशेष कक्षा
में चलती है | इस कक्षा के चारों ओर कुछ
तारकदल हैं – जिन्हें राशि राशि कहा जाता है तथा जिनकी संख्या वैदिक ज्योतिष के
अनुसार 12 मानी गई है | इन बारह राशियों को पुनः 27 भागों में विभक्त किया गया है – जिन्हें
नक्षत्र कहा जाता है |
चन्द्रमा
अपने उदयकाल में जिस नक्षत्र पर होता है उसे चन्द्रनक्षत्र कहा जाता है और उसी को
आधार बनाकर समस्त गणनाएँ की जाती हैं |
इस प्रकार ज्योतिष केवल
भविष्य की सम्भावित घटनाओं का फलकथन मात्र नहीं है, अपितु एक विज्ञान भी है... और इसीलिए यह हमारे वर्तमान के साथ साथ
भूत और भविष्य को भी देखने की सामर्थ्य रखता है... एक सीमा तक... लक्ष्यप्राप्ति
के लिए आवश्यकता है इच्छाशक्ति को दृढ़ रखते हुए अपने कर्मों के द्वारा अपने
वर्तमान को सशक्त बनाने की... और भविष्य की नींव में हमारा वर्तमान ही तो होता
है...
To read full article, visit:
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें