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सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि

ॐ माहेश्वराय नमः, ॐ महादेवाय नमः
ॐ सुरेश्वराय नमः, ॐ शिवाय नमः
ॐ शंकराय नमः, ॐ शाश्वताय नमः
ॐ पाशुपतये नमः, ॐ उमापतये नमः
ॐ ब्रह्माधिपतये नमः, ॐ परमेश्वराय नमः
ॐ भस्मांगरागाय नमः, ॐ महेशाय नमः
ॐ नित्याय नमः, ॐ शुद्धाय नमः
ॐ मृत्युंजयाय नमः, ॐ भूतेशाय नमः
ॐ मृडाय नमः, ॐ सर्वाय नमः
ॐ सदाशिवाय नमः, ॐ भवाय नमः
ॐ सर्वज्ञाय नमः, ॐ भीमाय नमः
ॐ वासुदेवाय नमः, ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः
देवाधिदेव भगवान शंकर सभी मित्रों की मनोकामनाएँ पूर्ण करें, कल महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इसी भावना से सभी मित्रों को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ...





सोमवार, 29 जनवरी 2018

Our Future is not Uncertain



पृथिवी सौरमण्डल का एक ग्रह है अतः इस पर सूर्य, चन्द्र तथा सौरमण्डल के अन्य ग्रहों का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है | पृथिवी अपनी विशेष कक्षा में चलती है | इस कक्षा के चारों ओर कुछ तारकदल हैं – जिन्हें राशि राशि कहा जाता है तथा जिनकी संख्या वैदिक ज्योतिष के अनुसार 12 मानी गई है | इन बारह राशियों को पुनः 27 भागों में विभक्त किया गया है – जिन्हें नक्षत्र कहा जाता है | चन्द्रमा अपने उदयकाल में जिस नक्षत्र पर होता है उसे चन्द्रनक्षत्र कहा जाता है और उसी को आधार बनाकर समस्त गणनाएँ की जाती हैं |
इस प्रकार ज्योतिष केवल भविष्य की सम्भावित घटनाओं का फलकथन मात्र नहीं है, अपितु एक विज्ञान भी है... और इसीलिए यह हमारे वर्तमान के साथ साथ भूत और भविष्य को भी देखने की सामर्थ्य रखता है... एक सीमा तक... लक्ष्यप्राप्ति के लिए आवश्यकता है इच्छाशक्ति को दृढ़ रखते हुए अपने कर्मों के द्वारा अपने वर्तमान को सशक्त बनाने की... और भविष्य की नींव में हमारा वर्तमान ही तो होता है...
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शनिवार, 13 जनवरी 2018



मकर राशि में सूर्य अपने शत्रु ग्रह की राशि में गोचर कर जाता है | फिर इस पर्व का इतना अधिक महत्त्व क्यों माना जाता है ? वास्तव में वर्ष को दो भागों में बाँट गया है | पहला भाग "उत्तरायण" और दूसरा भाग "दक्षिणायन" कहालाता है | मकर संक्रान्ति के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारम्भ होती है इसलिये इसको उत्तरायणी भी कहते हैं |
तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में मनाते हैं | कर्नाटक, केरल तथा आन्ध्र प्रदेशों में इसे संक्रान्ति और पोंगल दोनों नामों से मनाया जाता है क्योंकि यह संक्रान्ति माघ-पौष में पड़ती है अतः इसे पौषी संक्रान्ति भी कहते हैं | वेदों में पौष माह को “सहस्य” भी कहा गया है, जिसका अर्थ होता है वर्ष ऋतु, अर्थात् शीतकालीन वर्षा ऋतु | पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्रों का उदय इस समय होता है | पुनर्वसु का अर्थ है एक बार समाप्त होने पर पुनः उत्पन्न होना, पुनः नवजीवन का आरम्भ करना | और पुष्य अर्थात् पुष्टिकारक | पौष के अन्य अर्थ हैं शक्ति, प्रकाश, विजय | इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि इस संक्रान्ति का इतना अधिक महत्व किसलिये है | यह संक्रान्ति हमें नवजीवन का संकेत और वरदान देती है |
इस पर्व को परिवर्तन का पर्व भी कहा जा सकता है - एक ऐसा परिवर्तन जो सार्थकता लिये हुए होता है | तो आइये इस परिवर्तन के प्रकाश पर्व को इस संकल्प के साथ मनाएँ कि समाज में व्याप्त कुरीतियाँ और दुराचार सूर्यदेव की दृष्टि से भस्म हो जाएँ और एक स्वस्थ समाज का सूत्रपात हो | इसी कामना के साथ सभी पाठकों को कल होने वाले मकर संक्रान्ति के प्रकाश पर्व और पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएँ...
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