माघ माह की
कृष्ण पक्ष की एकादशी षट्तिला एकादशी कहलाती है | पद्मपुराण में एकादशी व्रत के
माहात्म्य का विशेष रूप से वर्णन है | इस दिन तिलों तथा
तिलों से निर्मित वस्तुओं के दान का विशेष महत्त्व माना जाता है | भारतीय वैदिक ज्योतिषी – Vedic Astrologers – तथा भारतीय हिन्दू जनमानस की ऐसी मान्यता है कि इस दिन तिलों का छह
प्रकार से उपयोग किया जाना चाहिए, जैसे तिलमिश्रित जल से
स्नान, तिल का तिलक, तिलमिश्रित जल का
सेवन, तिलमिश्रित जल से अर्घ्य, तिल से
बने पदार्थों का भोजन और तिल से हवन करना कल्याणकारी होता है | सम्भवतः इसीलिए इसका नाम षट्तिला एकादशी है | साथ
ही एक बात और भी महत्त्वपूर्ण है कि उत्तर भारत में जब षट्तिला एकादशी का व्रत किया
जाता है उन दिनों सर्दी का मौसम होता है तथा तिलों का सेवन बहुतायत में किया जाता
है तथा लाभकारी माना जाता है |
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