वसन्त के
मनमोहक संगीत के साथ सभी मित्रों को सरस्वती पूजन, निराला जयन्ती तथा प्रेम के मधुमय वासन्ती पर्व वसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाएँ... इस आशा और विश्वास के साथ कि हम सब ज्ञान प्राप्त
करके समस्त भयों तथा सन्देहों से मोक्ष प्राप्त कर अपना लक्ष्य निर्धारित करके आगे
बढ़ सकें... ताकि अपने लक्ष्य को प्राप्त करके उन्मुक्त भाव से प्रेम का राग आलाप
सकें...
संग
फूलों की बरात लिए लो ऋतु वसन्त अब चहक उठी ||
कोयल की
तान सुरीली सी,
भँवरे की गुँजन रसभीनी
सुनकर
वासन्ती वसन धरे, दुलहिन सी धरती लचक उठी |
धरती का
लख कर नवयौवन, लो
झूम उठा हर चरन चरन
हर कूल
कगार कछारों पर है मधुर रागिनी झनक उठी ||
ऋतु ने
नूतन शृंगार किया, प्राणों में भर अनुराग दिया
सुख की
पीली सरसों फूली, फिर नई उमंगें थिरक उठीं |
पर्वत
टीले वन और उपवन हैं झूम रहे मलयानिल से
लो झूम
झूम कर मलय पवन घर द्वार द्वार पर महक उठी ||
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