शीत की अलसाई यामिनी में
साँझ ढले ही पर्वत श्रृंखलाएँ
मेघों की चादर तान सो जाती हैं गहन निद्रा में…
कात्यायनी
शीत की अलसाई यामिनी में
साँझ ढले ही पर्वत श्रृंखलाएँ
मेघों की चादर तान सो जाती हैं गहन निद्रा में…
कात्यायनी
WOW Personality प्रोग्राम में हमारा प्रयास रहता है आपको उन व्यक्तित्व से रूबरू कराना जिन्होंने न केवल स्वयं के लिए कुछ किया है, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए भी समर्पित हैं - विशेष रूप से महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए… जिनसे हम सभी को प्रेरणा प्राप्त होती है... इस क्रम में हम अपनी संस्था के पोस्ट होल्डर्स और कुछ इसी तरह के सदस्यों से भी आपको मिलवा रहे हैं… आज संस्था की Secretary General और एक प्रसिद्ध ज्योतिषी, वास्तुविद, लेखिका, कवयित्री डॉ पूर्णिमा शर्मा कात्यायनी जी से बात की है संस्था की Cultural Secretary श्रीमती लीना जैन…
https://youtu.be/MobXd6iSkP8
स्व और पर - यदि मनुष्य में विजय प्राप्ति और आत्म प्रतिष्ठा की कामना होगी, उसमें स्वाभिमान होगा, तभी उसमें विचार शक्ति का विकास होगा. और विचार शक्ति का विकास होगा, तभी वह कर्म में प्रवृत्त होगा | परिवार, समाज, जातीयता, राष्ट्रवाद इन सबकी सृष्टि इसी विचार शक्ति और कर्म का परिणाम होती है | इसी के कारण जीवों में आत्मीयता का बन्धन दृढ़ होता है, जिनमें आत्मरक्षा और आत्म प्रतिष्ठा की शक्ति अर्थात जीवनी शक्ति नही होती वे वास्तव में सृष्टि प्रवाह में पीछे रह जाते हैं या लुप्त हो जाते हैं… कात्यायनी
https://youtu.be/hmP11ViHUQc
प्रेम बन जाएगा ध्यान
प्रेम, एक ऐसा अनूठा भाव जिसका न कोई रूप न रंग... जो स्वतः ही आ जाता है मन के भीतर... कैसे... कब... कहाँ... कुछ नहीं रहता भान... हाँ, करने लगे यदि मोल भाव... तो रह जाना होता है रिक्त हस्त... इसी प्रकार के कुछ उलझे सुलझे से भाव हैं हमारी आज की रचना में... जो प्रस्तुत है सुधी पाठकों के लिए... कात्यायनी...
https://youtu.be/rFAAMiIVMr0