पञ्चांग के पाँचों
अंगों तथा राहुकाल और यमगंड के विषय में पिछले लेखों में लिखा जा चुका है | अब गुलिका
के विषय में |
किन्तु, कोई भी
कार्य आरम्भ करने से पूर्व शुभ मुहूर्त का चयन अच्छी सोच है, किन्तु इस सबसे ऊपर
व्यक्ति का अपना कर्म होता है | व्यक्ति में सामर्थ्य है तो अशुभ मुहूर्त को भी
अनुकूल बना सकता है | अतः कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहली और
महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है व्यक्ति उचित दिशा में प्रयास करता हुआ कर्मशील रहे | कोई
भी Vedic Astrologer – अशुभ मुहूर्त का भय न दिखाकर उचित मार्गदर्शन ही करता
है |
हम सभी कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य को
प्राप्त करें...
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