शनिवार, 13 जनवरी 2018

सूर्य का मकर राशि में संक्रमण



आज 14 जनवरी 2018 को 13:47 पर भगवान भास्कर का धनु राशि से मकर राशि में संचार होगा | जिसे “मकरसंक्रान्ति” के नाम से जाना जाता है | संक्रमण का पुण्य काल 13:47 से लेकर 18:19 यानी चन्द्रोदय के समय तक रहेगा तक इसी दिन सूर्य का उत्तरायण गमन आरम्भ हो जाता है | सभी को सूर्यदेव के उत्तरायण प्रस्थान की हार्दिक शुभकामनाएँ | भगवान सूर्य 13 फरवरी 2018 को 02:48 तक मकर राशि में निवास करके आगे कुम्भ राशि में प्रस्थान करेंगे | जैसा कि हम सभी जानते हैं, सूर्य समस्त चराचर में प्रकाश, ऊर्जा तथा प्राणों का संचार करने वाला आत्मतत्व है – प्राण तत्व है – शक्ति है | साथ ही, वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य पिता तथा पूर्वजों का भी प्रतिनिधित्व करता है | मकर राशि में भ्रमण करते हुए सूर्य चौबीस तारीख तक उत्तराषाढ़ में, उसके बाद सात फरवरी तक श्रवण में विचरण करते हुए सात फरवरी को धनिष्ठा नक्षत्र में प्रस्थान कर जाएँगे | उत्तराषाढ़ राजसी प्रवृत्ति का ऊर्ध्वमुखी ध्रुव अर्थात स्थिर नक्षत्र है तथा इसकी नाड़ी कफ है | श्रवण की नाड़ी भी कफ है और यह भी राजसी प्रवृत्ति का ऊर्ध्वमुखी किन्तु चर नक्षत्र है | धनिष्ठा ऊर्ध्वमुखी नक्षत्र है किन्तु इसकी नाड़ी पित्त है तथा यह तामसी प्रवृत्ति का और चर नक्षत्र है |
साथ ही, कुम्भ राशि में विचरण करते समय सूर्य को कुछ समय शुक्र का सान्निध्य प्राप्त होगा, कुछ समय शुक्र और बुध दोनों का साथ रहेगा, कुछ समय केवल बुध का साथ रहेगा | किन्तु इस सबसे भी अधिक – केतु का साथ भी बना रहेगा | यों देखा जाए तो सूर्य की अपनी राशि सिंह है और मेष राशि में सूर्य अपनी उच्च राशि में होता है | अब इस दृष्टि से यदि देखें तो मकर राशिगत सूर्य अपनी उच्च राशि से दशम भाव  में तथा अपनी राशि सिंह से छठे भाव  में गोचर करता है |
इन्हीं समस्त बातों को ध्यान में रखते हुए आइये जानने का प्रयास करते हैं कि मकर राशि में भ्रमण करते हुए सूर्य के विभिन्न राशियों के लिए क्या सम्भावित परिणाम हो सकते हैं |
किन्तु, सूर्य या किसी भी अन्य ग्रह के किसी विशिष्ट राशि में संचार के क्या फल हो सकते हैं इसका विस्तृत अध्ययन तो एक Vedic Astrologer व्यक्ति विशेष की कुण्डली समग्र अध्ययन करने के बाद ही बता सकता है | यहाँ तो केवल सामान्य परिणामों के विषय में ही लिखा जा सकता है |

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