हम सकारात्मक भाव से समस्त मानवीय आदर्शों का
पालन करते हुए वर्तमान में जीने की कला तभी सीख सकते हैं जब हम नियमों में बंधे
प्राकृतिक सौन्दर्य को मन की आँखों से निहारते हुए उसमें खो जाना सीख जाएँगे | जिस दिन हमने स्वयं
को प्रकृति के इस उन्मुक्त किन्तु नियमित सौन्दर्य में डुबा दिया उसी दिन से हम जीवन
का वास्तविक आनन्द उठाना आरम्भ कर देंगे | सभी का आज का दिन आनन्दमय हो...
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