कल होलिका दहन
का पर्व है और सायंकाल सात बजकर सैतीस मिनट पर भद्रा की समाप्ति पर होलिका दहन का
मुहूर्त आरम्भ होता है, और उसके बाद आरम्भ हो जाएँगी रंगों की मस्तीभरी बौछारें | होलिका
दहन अर्थात सत्य, निष्ठा, विश्वास, आस्था, उदारता आदि सद्भावों की
अग्नि में असत्य, अविश्वास, अनास्था,
क्रूरता, घृणा, द्वेष, क्रोध रूपी
दुर्भावों की होलिका का दहन | यों होलिका दहन के विषय में भगवान विष्णु के परम
भक्त प्रह्लाद तथा उनकी बुआ होलिका की कथा सभी जानते हैं |
होलिका दहन के
बाद रंगों की वर्षा आरम्भ हो जाती है और उसके साथ उद्भव हो जाता है एक नवीन आनन्द
का – एक नवीन उल्लास का | रंग हमारे जीवन को पूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं |
व्यक्ति के जीवन में हताशा और निराशा भर गई हो तो रंगों का जादू उसे दूर करके नई
ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है | हमारी भावनाओं के साथ - हमारे आवेगों के
साथ रंगों का बहुत गहरा सम्बन्ध है | रंग प्रतीक हैं आकर्षण के, आनन्द के, हर्षोल्लास के | रंग प्रतीक हैं उन समस्त भूमिकाओं के – उन समस्त सम्बन्धों
के - जिनका व्यक्ति अपने जीवनकाल में विभिन्न स्तरों पर विविध परिस्थितियों में
निर्वाह करता है | और होलिका दहन के बाद रंगों का उत्सव इसी बात का संकेत है कि
व्यक्ति को समस्त दुर्भावों को भस्म करके अपने विभिन्न प्रकार के उत्तरदायित्वों
का पूर्ण आनन्द एवं उत्साह के साथ निर्वाह करना चाहिए |
तो आइये साथ
मिलकर वैमनस्य, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, घृणा
जैसे अनेकों दुर्भावों की होलिका को भस्म करके समस्त प्रकार के सद्भावों के
प्रह्लाद को जीवनदान दें, ताकि प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी
प्रकार के रंगों की बौछारों से समस्त जड़ चेतन आनन्दित,
आह्लादित और उत्साहित होकर झूम उठे...
होली की रंगभरी
हार्दिक शुभकामनाएँ...
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