गुरुवार, 4 जनवरी 2018

श्री गणपत्यथर्वशीर्ष स्तोत्रम्



हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि यदि पूर्ण एकाग्रचित्त से संकल्पयुक्त होकर गणपति की पूजा अर्चना की जाए तो उसके बहुत शुभ फल प्राप्त होते हैं | प्रायः सभी Vedic Astrologer बहुत सी समस्याओं के समाधान के लिए पार्वतीसुत गणेश की उपासना का उपाय बताते हैं | और आज तो संकष्टचतुर्थी का व्रत भी है | इसी निमित्त प्रस्तुत है “श्री गणपति अथर्वशीर्ष स्तोत्रम्”...
इस समग्र गणपति स्तोत्र का भाव यही है कि भगवान गणेश ही सृष्टि का आरम्भ हैं तथा समस्त कर्मों के करता, समस्त किल्विषों के हर्ता, समस्त सुखों के दाता तथा समस्त प्रकार के ज्ञान विज्ञान के दाता हैं | भगवान गणेश किसी भी समय काल देहादि की सीमाओं से परे हैं | समस्त तत्त्व इन्हीं से हैं | ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इन्द्राग्नि, वायु, सूर्य, चन्द्र समस्त भूर्भुवःस्व: सब भगवान गणेश ही हैं | ये समस्त चराचर जगत इन्हीं से उत्पन्न होकर इन्हीं में लय हो जाता है | जो श्रद्धाभक्ति पूर्वक इनका ध्यान करता है वह चारों पुरुषार्थों का पालन करते हुए समस्त पापों से मुक्त होकर सुख प्राप्त करता है...
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