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रविवार, 21 जनवरी 2018



वसन्त के मनमोहक संगीत के साथ सभी मित्रों को सरस्वती पूजन, निराला जयन्ती तथा प्रेम के मधुमय वासन्ती पर्व वसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाएँ... इस आशा और विश्वास के साथ कि हम सब ज्ञान प्राप्त करके समस्त भयों तथा सन्देहों से मोक्ष प्राप्त कर अपना लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ सकें... ताकि अपने लक्ष्य को प्राप्त करके उन्मुक्त भाव से प्रेम का राग आलाप सकें...
संग फूलों की बरात लिए लो ऋतु वसन्त अब चहक उठी ||
कोयल की तान सुरीली सी, भँवरे की गुँजन रसभीनी
सुनकर वासन्ती वसन धरे, दुलहिन सी धरती लचक उठी |
धरती का लख कर नवयौवन, लो झूम उठा हर चरन चरन
हर कूल कगार कछारों पर है मधुर रागिनी झनक उठी ||
ऋतु ने नूतन शृंगार किया, प्राणों में भर अनुराग दिया
सुख की पीली सरसों फूली, फिर नई उमंगें थिरक उठीं |
पर्वत टीले वन और उपवन हैं झूम रहे मलयानिल से
लो झूम झूम कर मलय पवन घर द्वार द्वार पर महक उठी ||

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शनिवार, 20 जनवरी 2018

श्री सरस्वती स्तोत्रं / Shree Saraswati Stotram / मां पातु भगवती सरस्वती


कल 22 जनवरी 2018 दिन सोमवार - माता सरस्वती – जो समस्त प्रकार के ज्ञान विज्ञान – जिसमें Vedic Astrology भी शामिल है - की उपासना का दिन है वसन्त पञ्चमी का पावन पर्व | इस अवसर पर वाग्देवी (ऋग्वेद में माँ सरस्वती के दो रूप अपलब्ध होते हैं – वाग्देवी और सरस्वती) को श्रद्धा सहित नमन...
पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवतीयज्ञं वष्टु धियावसुः
चोदयित्री सूनृतानां चेतन्ती सुमतीनाम्यज्ञं दधे सरस्वती
महो अर्णः सरस्वती प्र चेतयति केतुनाधियो विश्वा वि राजति
ऋग्वेद - 1/3/10-12
हे माता सरस्वती आपको जो यज्ञ हम समर्पित कर रहे हैं उसके द्वारा आपका प्रदत्त ज्ञान हमारे मनों में सदा निवास करे | माँ सरस्वती हमें सत्य के लिए प्रेरित करती रहें और हमारी सद्बुद्धि को जागृत करती रहें | माता सरस्वती को हम यज्ञ समर्पित करते हैं | विश्व में ज्ञान का प्रकाश प्रसारित करने वाली माँ सरस्वती हमारी बुद्धि में भी वृद्धि करें |
या कुन्देन्दु तुषारहारधवला या शुभ्र वस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना |
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभितिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु भगवती सरस्वती नि:शेषजाड्यापहा ||
जो कुन्द के श्वेत पुष्प, धवल चन्द्र, श्वेत तुषार तथा धवल हार के सामान गौरवर्ण हैं, जो शुभ्र वस्त्रों से आवृत हैं, हाथों में जिनके उत्तम वीणा सुशोभित है, जो श्वेत पद्मासन पर विराजमान हैं, ब्रह्मा विष्णु महेश आदि देव जिनकी वन्दना करते हैं तथा जो समस्त प्रकार की जड़ता को दूर करने में समर्थ हैं ऐसी भगवती सरस्वती हमारा उद्धार करें |
लक्ष्मीर्मेघा धरा पुष्टिर्गौरी तुष्टि: प्रभा धृति :
एताभि पाहि तनुभिरष्टाभिर्मा सरस्वति ||
लक्ष्मी, मेघा, धरा, पुष्टि, गौरी, तुष्टि, प्रभा और धृति इन अष्ट मूर्तियों सहित हे माता सरस्वती हमारी रक्षा करो |
सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नमः
वेदवेदान्तवेदांगविद्यास्थानेभ्यः एव च ||
जो समस्त वेद, वेदान्त, वेदांग तथा समस्त विद्याओं का मूल स्थान हैं ऐसी माता भद्रकाली सरस्वती को हम प्रणाम करते हैं |
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने
विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोSस्तु ते ||
हे महाभाग्यवती, ज्ञानरूपा, कमल के सामान नेत्रों वाली तथा ज्ञान की दात्री देवी माँ सरस्वति हमारा समस्त अज्ञान दूर कर हमें ज्ञान का प्रकाश प्रदान करो, हम तुम्हें प्रणाम करते हैं |
सरस्वती पूजन के पावन पर्व पर सभी के लिए यही कामना है कि माँ वाणी हम सबके हृदयों से अज्ञान का अन्धकार दूर कर ज्ञान का प्रसारित करें...