आज तीसरा
नवरात्र है और नवरात्रों में कुछ तन्त्र साधक दश महाविद्याओं की सिद्धि के लिए भी
साधना करते हैं | शाक्त सम्प्रदाय ने इस विश्वास को पोषित किया कि सर्वशक्तिमान
केवल एक नारी ही है | वास्तव में शक्ति ही जीवन है, शक्ति ही सत्य है तथा शक्ति
सर्वत्र व्याप्त भी है | फिर चाहे वह नवदुर्गा के नौ रूपों में प्रतिबिम्बित होती
हो अथवा दशमहाविद्याओं के रूप में | दशमहाविद्याओं की साधना यद्यपि तान्त्रिक
साधना है, किन्तु यदि साधारण साधक भी यदि इनकी सामान्य रूप
से उपासना करें तो उनके लिए भी ये शुभ फलदायी होती हैं |
ये दशो महाविद्याएँ
समस्त कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली तथा सर्वार्थ का साधन करने वाली हैं, किन्तु
इनकी उपासना की विधियाँ प्रायः तान्त्रिक हैं तथा बहुत कठिन हैं | और हमारा ऐसा
मानना है कि गृहस्थी लोगों को इस प्रकार की तान्त्रिक उपासनाओं से प्रायः बचना
चाहिए | यदि उपासना में थोड़ी सी भी चूक हो जाए तो न केवल साधक पर बल्कि उसके
परिवार के लिए भी घातक सिद्ध हो सकती है |
देवी के सभी रूप
समस्त संसार का कल्याण करें यही कामना है...
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