श्री शिवाष्टक स्तोत्रम्
आज बहुत से लोग प्रदोष के व्रत का पालन
कर रहे हैं | प्रदोष का व्रत परिवार में सुख-शान्ति-समृद्धि के लिए तथा सन्तान की
मंगलकामना से प्रायः किया जाता है | इस दिन भगवान् शंकर की पूजा अर्चना का विधान
है | इस व्रत के विषय में पहले लिख चुके हैं | आज, भगवान् शंकर की
प्रार्थना के लिए शिवाष्टक...
भगवान् शिव की महिमा का वर्णन तथा उनकी
प्रार्थना के लिए बहुत सारे स्तोत्र और मन्त्र हमारे ऋषि मुनियों ने उच्चरित किये
हैं – जिनमें “शिवाष्टक” भी अनेक प्रकार के हैं, जिनके भावार्थ भी
प्रायः सामान ही हैं | उन्हीं में से आज प्रस्तुत है एक “शिवाष्टक”...
प्रभुमीशमनीशमशेषगुणं
गुणहीनमहीश गरलाभरणम् |
रण निर्जित दुर्जय
दैत्यपुरं प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम् ||1||
गिरिराज सुतान्वित
वामतनुं तनुनिन्दितराजित कोटिविधुम् |
विधिविष्णुशिरोधृत
पादयुगं प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम् ||2||
शशलान्च्छितरंजित
सन्मुकुटं कटिलम्बितसुन्दर कृत्तिपटम् |
सुरशैवलिनी
कृतपूतजटं प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम् ||3||
नयनत्रयभूषित
चारुमुखं मुखपद्मपराजित कोटिविधुम् |
विधुखण्डविमण्डित
भालतटं प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम् ||4||
वृषराज निकेतनमादि
गुरुं गरलाशनमाजिविषाणधरम् |
प्रमथाधिपसेवक
रन्जनकं प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम् ||5||
मकरध्वजमत्तमतंग हरं
करिचर्मगनागविबोधकरम् |
वरमार्गणशूलविषाणधरं
प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम् ||6||
जगदुद्भवपालननाशकरं
त्रिदिवेशशिरोमणि धृष्टपदम् |
प्रियमानवसाधुजनैकगतिं
प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम् ||7||
अनाथं सुदीनं विभो
विश्वनाथं पुनर्जन्मदु:खात् परित्राहि शम्भो |
भजतोखिलदुःख समूहहरं
प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम् ||8||
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