आज प्रयास करते हैं दश महावियाओं के रूप
गुणादि के विषय में समझने का | इन सभी महाविद्याओं को दो कुलों में विभाजित किया गया है – काली कुल
और श्री कुल | काली कुल में महाकाली, तारा, छिन्नमस्ता तथा
भुवनेश्वरी आती हैं तथा ये सभी उग्र स्वभाव की हैं | त्रिपुरसुन्दरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती,
बगलामुखी, मातंगी और कमला श्रीकुल की देवियाँ हैं तथा स्वभाव
से सौम्य हैं | गृहस्थ लोगों को तान्त्रिक उपासना नहीं करनी चाहिए | क्योंकि तनिक
सी भी चूक घातक हो सकती है | किन्तु वे लोग यदि चाहें तो महाविद्याओं के सौम्य
रूपों का जाप कर सकते हैं |
दशमहाविद्याएँ सभी
की रक्षा करें तथा समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करें...
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