बुधवार 13 फरवरी 2018 को दोपहर दो बजकर 48 मिनट पर सूर्य का कुम्भ राशि में संक्रमण होने जा रहा है | जहाँ
वे बुधवार 14 मार्च को 23:43 तक विश्राम करके आगे मीन राशि में प्रस्थान कर जाएँगे
| अपनी इस यात्रा के दौरान भगवान भास्कर 20 फरवरी तक धनिष्ठा
नक्षत्र में, उसके बाद 5 मार्च तक शतभिषज में और अन्त में
पूर्वा भाद्रपद में संचार करेंगे | धनिष्ठा और शतभिषज दोनों ऊर्ध्वमुखी, चर, पित्त प्रकृति के तामसिक नक्षत्र हैं | पूर्वा भाद्रपद अधोमुखी, उग्र और वात प्रकृति का
सात्त्विक नक्षत्र है | अर्थात हम कह सकते हैं कि इस अवधि
में जन साधारण में पित्त और वात प्रकृति की अधिकता रहेगी – जो कि आमतौर पर इस मौसम
में रहती भी है | अतः मौसमी रोगों से बचने के लिए अपने खान
पान पर नियन्त्रण तथा जीवन शैली में परिवर्तन की आवश्यकता तो होगी ही | अधिकाँश लोग अपने कार्यक्षेत्र में प्रगति कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त इस यात्रा के दौरान सूर्य अपनी उच्च राशि मेष से ग्यारहवें
भाव में गोचर करेंगे – जो मेष राशि के लिए लाभ स्थान है, तथा
अपनी राशि सिंह से सप्तम भाव में गोचर करेंगे | इन दोनों
राशियों के जातको के लिए निश्चित रूप से यह अवधि शुभ फल देने वाली कही जा सकती है |
यह
प्रभाव चन्द्रमा की राशि को ध्यान में रखकर लिखा जा रहा है और चन्द्रमा एक राशि
में पूरे चौबीस घंटे रहता है तथा उन चौबीस घण्टों में हज़ारों बच्चों का जन्म होता
है | आवश्यक नहीं कि सबके लिए नीचे लिखी बातें सत्य सिद्ध हो जाएँ | किसी व्यक्ति
की कुण्डली का अध्ययन करते समय केवल एक ही तथ्य का आकलन नहीं किया जाता है अपितु
बहुत से सूत्रों के आधार पर किसी कुण्डली का अध्ययन किया जाता है तब किसी सम्भावित
परिणाम पर पहुँच सकते हैं | साथ ही, हर एक वर्ष में सूर्य पूरी बारह राशियों में
भ्रमण करता है अतः आवश्यक नहीं कि हर वर्ष सूर्य के किसी विशिष्ट राशि में गोचर
होने पर समान परिणाम ही परिलक्षित हों | इसलिए अधिक सत्य फलकथन के लिए तो आपको
किसी अच्छे वैदिक ज्योतिषी – Vedic Astrologer – से स्वयं मिलकर ही कुण्डली का
समग्र अध्ययन कराना होगा | तथापि, यदि दस प्रतिशत लोगों को भी इसका लाभ मिल सका तो
अपना ये प्रयास सफल मानेंगे...
तो आइये
जानते हैं ज्योतिषीय आधार पर जन साधारण पर क्या होगा सूर्य के इस गोचर का सम्भावित
प्रभाव...
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