प्रत्येक दिन का
एक भाग राहुकाल माना जाता है | दिनमान को आठ भागों में विभक्त करके राहुकाल की गणना की जाती है |
क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग अलग स्थानों पर अलग अलग होता है इसलिए
राहुकाल का समय और अवधि भी हर स्थान पर अलग हो सकते हैं | प्रायः इसका समय डेढ़
घंटे का रहता है जो दिनमान की अवधि के अनुसार कम अथवा अधिक भी हो सकता है | इस
अवधि में कोई भी शुभ कार्य आरम्भ करने की सलाह Vedic Astrologer नहीं देते |
अन्त में, शुभाशुभ मुहूर्त से भी ऊपर व्यक्ति का अपना कर्म होता है | व्यक्ति में सामर्थ्य और सकारात्मकता है तथा कार्य करने का उत्साह है तो
वह अशुभ मुहूर्त को भी अनुकूल बना सकता है | कोई भी Good Astrologer अशुभ मुहूर्त का भय न दिखाकर उचित मार्गदर्शन ही करता है |
अस्तु, हम सभी कर्मशील
रहते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करें...
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