अतः परं प्रवक्ष्यामि
मार्गशीर्षे सिता तु या, यस्याः श्रवणमात्रेण वाजपेयफलं लभेत् ||
मोक्षानामेति सा
प्रोक्ता सर्वपापहरा परा, देवं दामोदरं राजन्पूजयेच्च प्रयत्नतः ||
तुलस्यामंजरीभिश्च
धूपैर्दीपै: प्रयत्नतः, पूर्वेण विधिना चैव दशम्येकादशी तथा ||
मोक्षा चैकादाशी
नाम्ना महापातकनाशिनी, रात्रौ जागरणं कार्यं नृत्यगीतस्त्वैर्मम ||
पद्मपुराण 24/8-11
हे अर्जुन, मैं मार्गशीर्ष शुक्ल
पक्ष की एकादशी के विषय में बताता हूँ जिसके करने से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त
होता है | मोक्षदा एकादशी समस्त पापों का नाश करती है इसलिए इस दिन रात्रि जागरण
करते हुए तुलसी की मंजरी तथा धूप दीपादि द्वारा नृत्य गीतादि के साथ भगवान दामोदर
- विष्णु की पूजा अर्चना करनी चाहिए...
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