पिछले लेख से हम पञ्चांग
पर चर्चा कर रहे हैं | जैसा कि पहले बताया, पञ्चांग का प्रथम अंग है दिन अथवा वार | अब
दूसरा अंग - तिथि |
जिस तरह अंग्रेज़ी
महीनों की तारीख़ें होती हैं, उसी प्रकार भारतीय वैदिक ज्योतिष - Indian Vedic Astrology - के अनुसार हिन्दू काल गणना के अनुसार एक माह में 30 तिथियाँ
होती हैं जो दो पक्षों में बंटी होती हैं – शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष | चन्द्र
मास शुक्ल प्रतिपदा से आरम्भ होकर कृष्ण अमावस्या तक रहता है और इस प्रकार
अमावस्या माह की अन्तिम तिथि हो जाती है – जिसे New Moon Day भी कहा जाता
है | माह की पन्द्रहवीं तिथि पूर्णिमा कहलाती है जिसे Full Moon Day भी
कहते हैं | अमावस्या के दिन सूर्य और चन्द्र का भोग्यांश लगभग बराबर होता है | इस
भोग्यांश के घटने बढ़ने से ही तिथि की गणना होती है |
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