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बुधवार, 17 जनवरी 2018

यात्रा मुहूर्त



मान लीजिये किसी नौकरी के इण्टरव्यू के लिए बुलावा आया है और जिस दिन इण्टरव्यू होना है उस दिन मुहूर्त अच्छा नहीं निकल रहा है, तो क्या व्यक्ति उस इण्टरव्यू के लिए जाएगा ही नहीं ? इसका परिणाम क्या होगा ? यही कि वह नौकरी किसी अन्य को मिल जाएगी और व्यक्ति को फिर नए सिरे से दूसरे स्थानों पर आवेदन भेज कर कुछ और समय ख़ाली बैठकर इण्टरव्यू के बुलावे की प्रतीक्षा करनी होगी | या फिर जिस शहर में जाना है वहाँ मुहूर्त के अनुसार हो सकता है कुछ दिन पहले पहुँचना पड़ जाए और होटल आदि में ठहरने की व्यवस्था करनी पड़े | एक तो वैसे ही हाथ में नौकरी नहीं ऊपर से होटलों के किराए की मार...
अतः, आवश्यक कार्य के लिए जाना हो तो किसी Vedic Astrologer से यात्रा के लिए मुहूर्त निकलवाएँ अवश्य, किन्तु किसी अन्धविश्वास का शिकार न बनें | केवल दो तीन आवश्यक बातें जान लेना ही काफ़ी होगा – जैसे यात्रा आरम्भ करते समय प्रयास करें कि चन्द्रमा अष्टम में न हो और लग्न अनुकूल हो | यदि ऐसा सम्भव नहीं भी हो सके तो इतना विचार अवश्य कर लें कि लग्न के सामने अर्थात सप्तम भाव में कोई ग्रह न हो – क्योंकि इसका अर्थ होता है कि आपके कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है | और तारा अवश्य शुभ हो – अर्थात जन्म नक्षत्र से 3, 5, 7, 12, 14, 16, 21, 23, और 25वाँ नक्षत्र न हो – क्योंकि इन्हें विपत, प्रत्यरि और वध नक्षत्र माना जाता है | किन्तु यदि कोई अच्छा मुहूर्त नहीं भी निकल रहा हो और यात्रा आवश्यक हो तब भी मुहूर्त का दोष निवारण करके यात्रा आरम्भ कर दीजिये... अपनी योग्यताओं पर, यात्रा के लिए आवश्यक तैयारियों पर तथा ईश्वर की कृपा पर भरोसा रखकर यात्रा के निकलिए... यात्रा सुखद और सफल रहेगी...
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मंगलवार, 9 जनवरी 2018

पंचांग - हिन्दी कैलेण्डर



भारतीय लोक जीवन में धार्मिक उत्सवों तथा ज्योतिषीय ज्ञान के साथ साथ शुभ कार्यों तथा यज्ञ आदि के लिए मुहूर्त ज्ञान करने हेतु भारतीय वैदिक पद्धति से काल गणना के लिए पञ्चांग का प्रयोग किया जाता है | जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है – पञ्चांग के पाँच अंग होते हैं – दिन और तिथि, मास, नक्षत्र, करण और योग | इनके अतिरिक्त राहुकाल, यमगण्ड, गुलिका और अभिजित मुहूर्त आदि के साथ साथ कुछ अन्य मुहूर्तों को भी पञ्चांग का ही अंग माना जाता है | इन सभी विषयों पर हम चर्चा कर चुके हैं | किन्तु पञ्चांग वास्तव में कहते किसे हैं ?
पञ्चांग एकप्रकार का कैलेण्डर होता है | जिस प्रकार कैलेण्डर से तारीखों का ज्ञान होता है, दिनों का ज्ञान होता है, सप्ताह और महीनों में आने वाले अवकाशों का ज्ञान होता है, हिन्दू पञ्चांग में यही सब कुछ वैदिक पद्धति के अनुसार और अधिक विस्तार के साथ उपलब्ध हो जाता है |
पञ्चांग भाचक्र के खगोलीय तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है | बारह महीनों का एक वर्ष और सात दिन का एक सप्ताह होता है | महीनों की गणना सूर्य और चन्द्र की गति के अनुसार की जाती है | चन्द्र की गति के अनुसार गणना वाले महीने चान्द्र मास कहलाते हैं, तथा सूर्य की गति से जिन मासों की गणना की जाती है वे सौर मास कहलाते हैं | इसके अतिरिक्त एक गणना पद्धति नक्षत्रों पर भी आधारित है | प्रत्येक माह में पन्द्रह पन्द्रह दिनों के दो पक्ष – शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष – होते हैं तथा प्रत्येक वर्ष में दो अयन होते हैं – उत्तरायण और दक्षिणायन होते हैं | 27 नक्षत्र इन दोनों अयनों में विभिन्न राशियों में भ्रमण करते रहते हैं | कुछ अपवादों को छोड़कर प्रायः गुजरात और उत्तर भारत में विक्रम सम्वत का प्रयोग होता है जो कि पूर्णिमान्त, होता है, तथा दक्षिण भारत में शक सम्वत अर्थात अमान्त सम्वत का प्रयोग होता है |
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