मंगलवार, 9 दिसंबर 2025

प्रेम बन जाएगा ध्यान कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा

प्रेम बन जाएगा ध्यान

प्रेम, एक ऐसा अनूठा भाव जिसका न कोई रूप न रंग... जो स्वतः ही आ जाता है मन के भीतर... कैसे... कब... कहाँ... कुछ नहीं रहता भान... हाँ, करने लगे यदि मोल भाव... तो रह जाना होता है रिक्त हस्त... इसी प्रकार के कुछ उलझे सुलझे से भाव हैं हमारी आज की रचना में... जो प्रस्तुत है सुधी पाठकों के लिए... कात्यायनी... 

https://youtu.be/rFAAMiIVMr0


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