बुधवार, 13 दिसंबर 2017

शीत की पीत भोर



भर लें रोम रोम में शीतल मन्द पवन की मादकता  
डूबते हुए प्रकृति के इस सुहाने हास-विलास में
जो करती रहती है नित नई संरचना
क्योंकि शीत की ये सुहानी पीत भोर
करती है नवीन आशा का संचार कण कण में...
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http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2017/12/14/%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%b0/

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017



ॐ ह्रीं अर्ह श्री पार्श्वनाथाय नमः
आज पौषकृष्ण एकादशी को जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की जयन्ती मनाई जा रही है | भगवान पार्श्वनाथ का जन्म आज से लगभग 3 हजार वर्ष पूर्व वाराणसी में इक्ष्वाकु वंश के महाराज अश्वसेन की पत्नी महारानी वामा के गर्भ से हुआ था |
भगवान पार्श्वनाथ ने मानव मूल्यों के संरक्षण तथा मानव मात्र के उत्थान के लिए तप किया, अपने शिष्यों को धर्म में दीक्षित किया और जन कल्याण के कार्य करते हुए ही अन्त में निर्वाण प्राप्त किया | ऐसे भगवान पार्श्वनाथ की जयन्ती की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ – इस भावना के साथ  कि हम सब भी उन्हीं के समान मानव मात्र के कल्याण के निमित्त कर्म करते रहें...
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